देश के महानायक हम सभी के आदर्श, मिसाइल मैन कलाम की जीवन गाथा-

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देश के महानायक हम सभी भारतवर्ष वासियों के आदर्श, मिसाइल मैन भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ अबुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम पर विशेष अवश्य पढ़ें :- 
 FORMER PRESIDENT OF INDIA AND MISSILE SCIENTIST DR.APJ ABDUL KALAM'S BIOGRAPHY.
नई दिल्ली,|मिसाइल मैन और जनता के राष्ट्रपति के रूप में लोकप्रिय हुए पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का सोमवार यहां आईआईएम में एक व्याख्यान देने के दौरान गिरने के बाद निधन हो गया। डा. कलाम को शाम करीब साढे छह बजे व्याख्यान के दौरान गिरने के बाद नाजुक हालत में बेथनी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया और उसके दो घंटे से अधिक समय बाद उनके निधन की पुष्टि की गयी।

कलाम अक्टूबर में 84 साल के होने वाले थे।मिसाइल मैन के नाम से लोकप्रिय पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम युवाओं और बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय थे। उनका व्यक्तित्व एक तपस्वी और कर्मयोगी का रहा। पूराजीवन लगन और कड़ी मेहनत की मिसाल रहा। अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों में शुमार डॉक्टर कलाम सच्चे अर्थों में भारत रत्न थे। उनकी जीवन गाथा किसी रोचक उपन्यास के नायक जैसी है। चमत्कारिक प्रतिभा के धनी अब्दुल कलाम का व्यक्तित्व इतना उन्नत था कि वह सभी धर्म, जाति एवं संप्रदायों में लोकप्रिय थे। उनकी स्वीकार्यता ऐसी थी कि वह  अपने जीवन काल में ही सबके लिए 'एक महान आदर्श' बन चुके थे। सत्तर और अस्सी के दशक में अपने कार्यों और सफलताओं से डॉक्टर कलाम खासे प्रसिद्ध हो चुके थे। उन्हें देश के चंद उम्दा वैज्ञानिकों में गिना जाने लगा था। उनकी ख्याति इतनी बढ़ गई थी कि तत्कालीनप्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने कैबिनेट के मंजूरी के बिना ही उन्हें कुछ गोपनीय परियोजनाओं पर कार्य करने को कहा था। अनुशासनप्रिय शाकाहारी जीवन डॉक्टर अब्दुल कलाम का व्यक्तिगत जीवन बेहद अनुशासित रहा।

 वे शाकाहारी थे। आजीवन अविवाहित रहे। वे कुरान और भगवद्गीता दोनों का अध्ययन करते थे। कलाम तिरुक्कुरल का भी अनुसरण करते थे,उनके भाषणों में कम से कम एक कुराल का उल्लेख अवश्य रहता था। संगीत से उनका गहरा लगाव था। कलाम ने तमिल भाषा में कविताएं भी लिखींं।बच्चों और युवाओं मे लोकप्रियअपने प्रेरक विचारों के कारण कलाम बच्चों और युवाओं के बीच अत्यधिक लोकप्रिय रहे। राष्ट्रपति पद से अवकाश लेने के बाद वे देशभर केशैक्षिक संस्थानों में छात्रों को संबोधित करने के लिए अपना समय जरूर निकाल लेते थे। अपने जीवन के अंतिम समय में भी वह छात्रों के ही साथ थे।मृत्युदंड के खिलाफकलाम मृत्युदंड की सजा दिए जाने के खिलाफ थे। उन्होंने इसी साल 2 जुलाई को विधि आयोग की पुरानी रिपोर्ट पर पुन: विचार करने का सुझाव दिया था, जिसमें विधि आयोग ने मृत्युदंड जारी रखने को बहाल किया था। उन्होंने उन पलों को भी याद किया जिसमें उन्हें राष्ट्रपति पद पर रहते हुए मृत्युदंड का फैसला सुनाने में काफी तकलीफ से गुजरना पड़ा था।
 अपने राष्ट्रपति काल के दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल के धनंजय चटर्जी के मृत्युदंड पर सहमति दी थी।
एपीजे अब्दुल कलाम ( 1931- 2015)पूरा नाम : अबुल पकिर जैनुलाब्दीन अब्दुल कलाम जन्म  : 15  अक्तूबर 1931, रामेश्वरम, तमिलनाडुबचपन : रामेश्वरम के धनुषकोडी गांव में एक मध्यमवर्ग संयुक्त मुस्लिम परिवार में कलाम जन्म हुआ । उनके पिता जैनुलाब्दीन मछुआरों को नाव किराये पर देने का काम करते थे। कलाम के पांच भाई एवं पांच बहनें थीं। रामेश्वरम टापू पर स्थित कलाम साहब का घर अब पर्यटक स्थल बन चुका है। बड़ी संख्या में रामेश्वर घूमने आने वाले लोग कलाम साहब के उस घर को देखने जाते हैं जहां उनका बचपन गुजरा।
प्रारंभिक शिक्षापांच वर्ष की आयु में रामेश्वरम के पंचायत प्राथमिक विद्यालय में उनकी पढ़ाई शुरू हुई। उनके शिक्षक इयादुराई सोलोमन ने उनसे कहा था कि 'जीवन में सफलता तथा अनुकूल परिणाम प्राप्त करने के लिए इच्छा, आस्था और अपेक्षा इन तीन शक्तियों को भलीभांति समझ लेना और उन पर प्रभुत्व स्थापित करना चाहिए।' अब्दुल कलाम ने अपनी आरंभिक शिक्षा जारी रखने के लिए अखबार बांटने का भी काम किया।1950 में सेंट जोसेफ कॉलेज, तिरुचरापल्ली से बीएससी।
1954 से 1957  मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से अंतरिक्ष विज्ञान में स्नातक।1958 में एचएएल, बेंगलुरु में नौकरी शुरू की।1960 में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र, थुंबा में योगदान1962 में वह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में आए।अंतरिक्ष विज्ञान में योगदानइसरो में उन्होंने होवरक्राफ्ट परियोजना पर काम शुरू किया। उन्होंने सफलतापूर्वक कई उपग्रह प्रक्षेपण परियोजनाओं में भूमिका निभाई। परियोजना निदेशक के रूप में भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।1980 में कलाम ने रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के निकट स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई। इसके साथ ही भारत भी अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया।1982 में डॉक्टर कलाम को डीआरडीओ का निदेशक नियुक्त किया गया।
उसी समय अन्ना विश्वविद्यालय, मद्रास ने इन्हें 'डॉक्टर आफ साइंस' की मानक उपाधि से सम्मानित किया। इसरो लॉन्च व्हीकल प्रोग्राम को परवान चढ़ाने का श्रेय भी कलाम को जाता है। डॉक्टर कलाम ने स्वदेशी लक्ष्य भेदी (गाइडेड मिसाइल) को डिजाइनकिया। इन्होंने अग्नि एवं पृथ्वी जैसी मिसाइलों को स्वदेशी तकनीक से बनाया था।1992 जुलाई से दिसंबर 1999 तक वे रक्षा मंत्री के विज्ञान सलाहकार और सुरक्षा शोध और विकास विभाग के सचिव थे।पोखरण परीक्षण1998 में उनकी देखरेख में भारत ने पोखरण में अपना दूसरा सफल परमाणु परीक्षण किया। इसके बाद भारत परमाणु शक्ति संपन्न राष्ट्रों की सूची में शामिल हुआ। परमाणु वैज्ञानिक राजा रमन्ना, जिनकी देखरेख में भारत ने पहला परमाणु परिक्षण किया था, ने कलाम को वर्ष 1974 में पोखरण में परमाणु परीक्षण देखने के लिए भी बुलाया था।

1963-64 के दौरान कलाम ने अमेरिका के अंतरिक्ष संगठन नासा की भी यात्रा की थी।भारत के राष्ट्रपति2002 में डॉक्टर कलाम भारत के ग्यारहवें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए। इन्हें भारतीय जनतापार्टी समर्थित एनडीए घटक दलों ने अपना उम्मीदवार बनाया था जिसका वामदलों के अलावा समस्त दलों ने समर्थन किया। 18 जुलाई 2002 को डॉक्टर कलाम को नब्बे प्रतिशत बहुमत द्वारा 'भारत का राष्ट्रपति' चुना गया था। उनका कार्यकाल 25 जुलाई 2007 को समाप्त हुआ।अंतिम काल में भी सतत सक्रियराष्ट्रपति पद से सेवामुक्त होने के बाद डॉक्टरकलाम शिक्षण, लेखन, मार्गदर्शन और शोध जैसे कार्यों में व्यस्त रहे। वह राष्ट्रीय प्रबंधन संस्थान, शिलांग, राष्ट्रीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद, राष्ट्रीय प्रबंधन संस्थान, इंदौर, में विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर जुड़े रहे।

वह भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु के फेलो, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी, तिरुवनंतपुरम के चांसलर, अन्ना यूनिवर्सिटी, चेन्नई में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के प्रोफेसर रहे। उन्होंने आईआईआईटी हैदराबाद, काशी हिंदू विश्वविद्यालय और अन्ना यूनिवर्सिटी में सूचना प्रौद्योगिकी भी पढ़ाया।पुरस्कार और सम्मान1980 इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (भारत) का नेशनल डिजाइन एवार्ड1981 में अब्दुल कलाम को भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया 1997 में डाक्टर कलाम को भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानभारत रत्न से नवाजा गया।1997 राष्ट्रीय एकता के लिए इंदिरा गांधी पुरस्कार।कई पुस्तकों से प्रेरणाअपनी जीवनी 'विंग्स ऑफ फायर' भारतीय युवाओं को मार्गदर्शन प्रदान करने वाले अंदाज में लिखी ।

इनकी दूसरी पुस्तक 'गाइडिंग सोल्स- डायलॉग्स ऑफ द पर्पज ऑफ लाइफ' आत्मिक विचारों को उदघाटित करती है। उनकी किताबें अंग्रेजी के अलावा हिंदीसमेत कई भाषाओं में प्रकाशित हुई और बेस्ट सेलर साबित हुईं।और भी किताबें- इंडिया 2020- ए विजन फॉर द न्यू मिलेनियम'- माई जर्नी- इग्नाटिड माइंड्स- अनलीशिंग द पॉवर विदिन इंडिया'।

न्यूज़ साभार : हिंदुस्तान समाचार पत्र