जिसने दुनिया को सिखाया "योग्यता किसी डिग्री की मोहताज नहीं" आधुनिक आनुवंशिकी के पिता की जीवन गाथा |

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ग्रेगर जोहान मेंडेल को उनके किसी शैक्षिक प्रतिभा के लिए नहीं जाना जाता है|उन्होंने अपने जीवन में कई काम करने की कोशिश की, जब तक कि वह अंतिम रूप से ऑस्ट्रिया ने ब्रुन में नहीं बस गए| यहाँ के ग्रामीण परिवेश के उत्कृष्ट बागानों में उन्होंने बागवानी का काम किया | यहाँ मेंडेल 7 सालों तक मटर के पौधों के साथ खेलते रहे| उन्होंने लम्बे, बौने और अलग-अलग रंगों के पौधों के बीच संकरण (cross) कराया और लगभग 28 हजार पौधों का अध्ययन किया और अपने निष्कर्षों को दर्ज किया| एक पीढ़ी की विशेषताएं अगली पीढ़ी तक कैसे जाती हैं? मेंडेल ने देखा कि प्रत्येक गुणवत्ता को नियंत्रित करने वाला एक विशिष्ट कारक है| मेंडेल ने यह पाया की इन कारकों को, जिसे अब हम जींस कहते हैं, आपस में मिलाया नहीं जा सकता| ये कारक अपनी स्वतंत्रता को बनाये
रखते हैं, प्रमुख कारक (dormant) ही अपना प्रभाव दिखता है,जबकि निष्क्रिय कारक (recessive), प्रमुख कारक के साथ निष्क्रिय रूप से साथ ही रहता है| उनके ये निष्कर्ष आनुवंशिकी की शुरुआत थी| ये सभी घटनाएँ 1866 के आस-पास की थी| मेंडेल के इन सभी अध्ययन और निष्कर्ष पर लगभग 34 वर्षों तक किसी का ध्यान नहीं गया| परन्तु बाद में यह पाया गया की मेंडेल के यह सिद्धांत डार्विन के विकास (evolution) के सिद्धांत को समर्थन देते हैं, जल्दी ही मेंडेल और आनुवंशिकी पर उसका अवलोकन सुर्खियों में आ गया और मेंडेल को आधुनिक आनुवंशिकी का पिता स्वीकार कर लिया गया|

जीवन में प्रमुख घटनायें एवं प्रमुख वैज्ञानिक योगदान (Major Events in Life & Major Scientific Contributions) :-  

जन्म – 22 जुलाई 1822, मोराविया, चेक
गणराज्य
मृत्यु – 1884, ब्रनो, चेक गणराज्य

वार्षिक पौधों में संकरण कराना मेंडेल का शौक बन गया था | मेंडेल 1842 में दर्शन शास्त्र से स्नातक हुए, 1843 में वह ब्रुन ऑस्ट्रिया,के एक इसाई मठ में पुजारी नियुक्त हुए, जो अब ब्रनो नाम से चेक गणराज्य में है| उन्होंने दो बार अध्यापक के लिए परीक्षा दी पर सफल नहीं हुए | पुजारी के रूप में उन्हें ग्रेगर (gregor) की उपाधि मिली थी| 1849 में उन्हें एक स्कूल में अस्थाई अध्यापक की नियुक्ति मिली| 1850 में वह विएना, ऑस्ट्रिया में उच्च शिक्षा के लिए गए, परन्तु वह अपनी शिक्षा पूरी किये बिना ही लौट आये और 1854 में उन्होंने पुनः अध्यापक की नौकरी कर ली| 1856 से 1864 तक इसाई मठ में रहने के दौरान ही उन्होंने मटर के पौधों पर अपने प्रयोग किये| उनके शोध पत्र 1865 में ब्रुन नेशनल हिस्ट्री सोसाइटी के वार्षिक पत्र में प्रकाशित हुए| उन्होंने 21000 पौधों पर अपने प्रयोगों के आधार पर :-

आनुवंशिकी के दो नियम दिए- 

1. First Law : The Law of Segregation

2. Second Law : The Law of Independent Assortment

 # Gregor Johann Mendel Biography In Hindi