मानो या न मानो एक कछुआ आपके पापा की लंबाई जितना,आइये जाने उस अनोखे कछुए के बारे में

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कछुआ का नाम आते ही तुम्हारे मन में छह इंच से लेकर अधिक से अधिक एक फुट तक के एक जीव का ख्याल आता है, लेकिन जरा सोचो कि कोई कछुआ तुम्हारे पापा की लंबाई जितना बड़ा हो! हां, समुद्र में ऐसे कछुए रहते हैं, जिनकी लम्बाई 6 फीट तक होती है। तुम्हें जानकर आश्चर्य होगा कि उसका वजन 25 या 50 किलोग्राम
नहीं होता, बल्कि 400 किलोग्राम तक होता है। समुद्र में रहने वाले इन कछुओं को समुद्री कछुआ कहा जाता है, लेकिन ये भी कई तरह के होते हैं। ग्रीन टर्टल, लेदरबैक, हॉक्सबिल, लॉगरहेड, ऑलिव रिडले, केम्प्स रिडले,
फ्लैटबैक आदि उनमें प्रमुख हैं।
 

 हम यहां ग्रीन टर्टल यानी हरे कछुए की ही बात करें तो बहुत ही बहादुर और मेहनत करने वाला जीव होता है यह। पानी में इसकी तैरने की रफ्तार 55-60 किलोमीटर प्रति घंटे होती है। यानी तुम्हारे स्कूल की बस जितनी तेज दौड़ती है, उससे भी अधिक तेज तैरता है कछुआ। इतना ही नहीं, यह लगातार कई-कई महीने तक यात्रा करता रहता है और कई-कई हजार किलोमीटर तक तैर जाता है।

 1996 में एक कछुआ की पीठ पर सेटेलाइट ट्रांसमीटर लगाकर पानी में छोड़ दिया गया। वह कछुआ छह हजार किलोमीटर तैरते हुए अफ्रीका से जापान पहुंच गया। तभी तो इसे समुद्र का सबसे अधिक लंबी यात्रा करने वाला जीव माना जाता है। इतना ही नहीं, यह कई घंटे तक बिना सांस लिए तैर सकता है, क्योंकि इसका रक्त हमारी तरह गर्म नहीं, बल्कि ठंडा होता है। ठंडा रक्त इसे बिना सांस लिए लंबी दूरी तक तैरने में सहायता करता है। समुद्र के पानी में तैरने वाले इस जीव को अगर पानी के बाहर समतल पर आना पड़े तो इसे कितनी तकलीफ होगी? लेकिन उसे पानी से बाहर आना पड़ता है।

  पानी के बाहर आकर उसे घिसट-घिसट कर चलना पड़ता है, फिर भी वह पानी के बाहर आता है। जब कोई फीमेल कछुआ अंडे देने लायक हो जाती है तो उसे समुद्र किनारे सही जगह की तलाश में भी काफी लंबी यात्रा करनी पड़ती है और फिर वह सही जगह पर बालू वाली मिट्टी की थोड़ी खुदाई कर उस गड्ढे में अंडे देती है। उसके अंडों की संख्या 70 से लेकर 190 तक हो सकती है। अंडे देकर वह समुद्र में चली जाती है। लगभग दो महीने बाद उन अंडों में से नन्हे कछुए निकलते हैं, जो अंडे से निकलते ही तेजी से पानी की ओर भागते हैं। लगभग दो-दो इंच के इन बच्चों को मगरमच्छ, चिडि़यां, केकड़ा आदि से जान बचाते हुए समुद्र में भागना पड़ता है। वहां पहुंचकर ये बच्चे बहुत सुरक्षित हो जाते हैं, जहां ये 80 साल तक जीते हैं। एक फीमेल कछुआ दो से चार साल में एक बार अंडे देती है।

 समुद्री कछुए सभी समुद्रों में घूमते रहते हैं, लेकिन ग्रीन टर्टल मुख्य रूप से अटलांटिक महासागर में पाया जाता है, जबकि इस्टर्न पेसिफिक ग्रीन टर्टल प्रशांत महासागर, हिन्द महासागर समेत काफी समुद्री क्षेत्रों में पाया जाता है। इन महासागरों के किनारे स्थित 80 से अधिक देशों के समुद्री किनारों पर फीमेल कछुए अंडे देती हैं। इनके अंडों को इंसानों से काफी खतरा रहता है, क्योंकि अगर पता चल जाए तो इंसान उन अंडों को निकालकर होटलों में बेच देते हैं। इस कारण इनकी संख्या भी कम होती जा रही है।