2050 तक 1 करोड़ मौतें होंगी एंटीबायोटिक के इस्तेमाल से | ऐसा क्यूँ होगा जाने बाल स्वास्थ्य के आलेख में |

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नई दिल्ली, विशेष संवाददाता ।
 डब्ल्यूएचओ ने एंटीबायोटिक दवाओं के अंधाधुंध इस्तेमाल को लेकर भारत समेत दक्षिण पूर्वी एशियाई के देशों को आगाह किया है।संगठन की दक्षिण एशियाई प्रमुख पूनम खेत्रपाल सिंह ने सदस्य राष्ट्रों के स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि वे एंटीबायोटिक   के इस्तेमाल को सीमित करें वर्ना माइक्रोबियल प्रतिरोध के कारण होने वाली मौतों में भारी इजाफा हो सकता है। डा. खेत्रपाल ने कहा कि एंटीबायोटिक दवाओं के।अंधाधुंध इस्तेमाल से उनके खिलाफ प्रतिरोध माइक्रोबियल पैदा हो रहे हैं।
 

 यदि इस पर उचित कदम नहीं।उठाए गए तो 2050 तक दुनिया में एंटी माइक्रोबियल प्रतिरोध से मरने वालों की संख्या एक करोड़ तक पहुंच।जाएगी। जिसका एक बड़ा हिस्सा भारत समेत दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में होगा। इससे सकल घरेल उत्पाद का 2 से 3.5 फीसदी तक का नुकसान हो सकता है।।दूसरे, हम इन एंटीबायोटिक दवाओं से भी हमेशा के लिए।हाथ धो बैठेंगे जो कि आज हमारे पास उपचार का एक बेहतर जरिया हैं। कई ऐसी एंटीबायोटिक दवाएं हैं जिनका अब तक कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने सभी राष्ट्रों से आगाह किया कि वे एंटीबायोटिक के इस्तेमाल पर नजर रखने के लिए तंत्र विकसित करें।

 अस्पतालों में संक्रण नियंत्रण के लिए सुधार।लाना होगा। दवाओं के उचित इस्तेमाल को लेकर नियम बनाने होंगे ताकि एंटीबायोटिक दवाओं को डाक्टर अनावश्यक रूप से नहीं लिखने पाएं। इसके लिए केमिस्टों के साथ-साथ मरीजों के लिए भी व्यापक जागरुकत अभियान चलाना होगा। केमिस्ट बिना डाक्टर की अनुमति के एंटीबायोटिक दवा दें और मरीज अपने मन से दवा खरीदकर नहीं खाएं और एंटीबायोटिक दवाओं का कोर्स पूरा करें तथा उसे बीच में नहीं छोड़ने पाएं।