चेचक (smallpox) के टीके के अविष्कारक एडवर्ड जेनर की कहानी

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एडवर्ड जेनर Edward Jenner (1749-1823) चेचक (smallpox) के टीके के अविष्कारक –

 अठारहवीं सदी में चेचक के महामारी दुनिया भर में, विशेष रूप से यूरोप में फैली हुई थी| इस समय एक ब्रिटिश चिकित्सक एडवर्ड जेनर, ने इन रोगियों के इलाज के बारे में सोचा| उन्होंने ध्यान दिया की वे दूधवाले  जिन्हें कभी गायों में पाया जाने वाला चेचक (cowpox) हुआ था, वे चेचक से बहुत कम प्रभावित होते थे| उन्होंने गायों में पाए जाने वाले चेचक का अध्ययन किया|

 उन्होंने चेचक से पीड़ित गाय के थन के छालों में से एक तरल निकला, और उसे एक लड़के के शरीर में इंजेक्ट कर दिया| लड़का कुछ समय तक बुखार से पीड़ित रहा, परन्तु वह जल्दी ही ठीक हो गया| जेनर ने तब एक और साहसिक प्रयोग करने का निश्चय किया, और उन्होंने चेचक से पीड़ित व्यक्ति के शरीर के छालों में से थोडा तरल लेकर उस लड़के के शरीर में इंजेक्ट कर दिया, अब यह लड़का चेचक से पीड़ित नहीं हुआ|

 तब जेनर ने इस प्रयोग को अपने रोगियों को चेचक से बचाने के लिए किया| इसके बाद उनके इन तरीकों से ही टीकों को बनाने का मार्ग प्रशस्त हुआ, और मानव जाति को कई जानलेवा महामारियों से मुक्ति मिली| चेचक (smallpox) दुनिया भर में अब पूरी तरह से समाप्त हो चुका है| इसका श्रेय एडवर्ड जेनर को ही जाता है|

जीवन में प्रमुख घटनायें एवं प्रमुख वैज्ञानिक योगदान Major Events in Life & Major Scientific Contributions

जन्म – 17 मई 1749, बर्कले, ग्लूस्टरशायर, इंग्लैंड
मृत्यु – 26 जनवरी 1823, इंग्लैंड
जेनर एक पैरिश पादरी के बेटे थे| 1762 में जेनर ने डॉ डैनियल लुडलो के साथ प्रशिक्षु के रूप में काम किया| 1770 में उन्होंने लन्दन के प्रसिद्ध सर्जन और शरीर-रचना विज्ञानी (anatomist), जॉन हंटर (John Hunter) के साथ काम किया| 1773 से बर्कले में उन्होंने स्वयं चिकित्सा सेवाएं देनी शुरू की|
अपनी चेचक के निदान की खोज के दौरान उन्होंने एक 8 वर्ष के लड़के जेम्स फिप्स (James Phipps) के ऊपर अपने प्रयोग किये, और यहीं से टीकाकरण का विचार उनके दिमाग में आया| उनके इस काम से चेचक को इंग्लैंड में 1872 तक नियंत्रित कर लिया गया| 1980 तक इसे पूरी तरह मिटा दिया गया| उनकी इस खोज से इस बात का भी पता चला की हमारा शरीर कैसे एंटीबाडी बनाकर विभिन्न रोगों से हमारी प्रतिरक्षा करता है|