भारतीय मुद्रण प्रौद्योगिकी के प्रमुख अनुसंधानकर्ता भिसे शंकर आबाजी का जीवन परिचय

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भिसे शंकर आबाजी Bhise Shankar Abaji
(1867-1935)

 भारतीय मुद्रण प्रौद्योगिकी के प्रमुख अनुसंधानकर्ता - मुद्रण प्रौद्योगिकी (printing technology) का सबसे पहले अविष्कार चीन में हुआ था| लगभग 150 वर्ष पहले छपाई का कम बहुत धीमा होता था, लगभग 150 अक्षर प्रति मिनट| तब एक प्रमुख ब्रिटिश छपाई कम्पनी ने दुनिया भर के इंजिनियरयों को इस चुनौती का सामना करने के लिए बुलाया |

 भिसे ने इस चुनौती को स्वीकार किया और वह मुद्रण प्रौद्योगिकी में छपाई की गति को 1200 अक्षर प्रति मिनट तक पहुँचाने में सफल रहे| भिसे ने बाद में इस गति को 3000 अक्षर प्रति मिनट तक पहुंचा दिया| तब उस समय की प्रतिष्ठित अमेरिकन जर्नल ‘साइंटिफिक अमेरिकन’ ने भिसे की उप्लाब्ध्लियों के बारे में एक लेख छापा| भिसे ने स्वचालित माडल का भी अविष्कार किया| भिसे ने मुद्रण प्रौद्योगिकी में 40 से ज्यादा पेटेंट हासिल किये| उन्होंने अमेरिका में मुद्रण मशीने बनाने की फैक्ट्री भी लगायी, और उन्हें दुनिया भर में बेचा|

जीवन में प्रमुख घटनायें एवं प्रमुख वैज्ञानिक योगदान Major Events in Life & Major Scientific Contributions

जन्म – 1867, भारत
मृत्यु – 1935 भारत
भिसे शंकर आबाजी बचपन से ही अभिनव और मेहनती थे| उनकी शिक्षा बहुत अच्छी नहीं थी| मुद्रण प्रौद्योगिकी में अपना सिक्का ज़माने के बाद उन्होंने दवाओं का भी निर्माण करने का काम किया| उनकी बनाई गई एक दवा प्रथम विश्व युद्ध में में अमेरिकी सेना द्वारा बहुत प्रयोग की गयी| अन्होने अन्य कई अविष्कार भी किये, इस कारन उन्हें भारत का एडिसन भी कहा जाता है|