जीवाणु विज्ञान के जनक रॉबर्ट कॉख की जीवन गाथा

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रॉबर्ट कॉख Robert Koch (1843-1910)

 जीवाणु विज्ञान के जनक Father of Science of Bacteriology –


 हम सभी जानते हैं की बैक्टीरिया बहुत सारी महामारियों के लिए जिम्मेदार होते हैं, परन्तु कुछ सौ साल पहले बैक्टीरिया और ये किस प्रकार जानलेवा महामारियां फैलाते हैं इस बात हमें बहुत कम की जानकारी थी| इस समय जर्मनी के जीवाणु विज्ञानी रॉबर्ट कॉख ने बहुत ही साधारण तकनीकों के द्वारा एंथ्रेक्स, हैजा और तपेदिक (anthrax, cholera and tuberculosis) फ़ैलाने वाले जीवाणुओं की खोज की|

  उन्होंने ही सबसे पहले टी.बी. के बैक्टीरिया की खोज की और औए अलग करने में सफलता प्राप्त की| रॉबर्ट कॉख ने मानव शरीर के बहार भी इन बैक्टीरिया की कालोनियों को विकसित किया और यह दिखाया की वे कैसे जानवरों में भी इस रोग को फैलाते हैं| टी.बी. को कॉख रोग (Koch’s disease) भी कहा जाता है| साधारण तरीकों से अपनी असाधारण खोजों के लिए रॉबर्ट कॉख को उनकी उपलब्धियों के लिए 1905 में नोबेल पुरुस्कार से सम्मानित किया गया|

जीवन में प्रमुख घटनायें एवं प्रमुख वैज्ञानिक योगदान Major Events in Life & Major Scientific Contributions

जन्म – 11 दिसंबर 1843, क्लौस्थल, (हार्ज़ के पहाड़ों में एक शहर), जर्मनी
मृत्यु – 28 मई 1910,
 बाडेन बाडेन, जर्मनी रॉबर्ट कॉख ने गौटिंगेन विश्वविद्यालय से 1862 में चिकित्सा विज्ञान का अध्ययन किया| अपने अनुसंधानों के लिए उन्होंने हैम्बर्ग में एक अस्पताल में कम किया और एमी फ्राटी से शादी कर ली| 1879 में उन्होंने माइक्रोस्कोप ख़रीदा और एंथ्रेक्स का अध्ययन किया| उनके सभी कामों को पोलैंड के ब्रेसलु विश्वविद्यालय द्वारा मान्यता मिली|

 कॉखको 1883 में मिस्र और भारत में हैजा का अध्ययन करने के लिए बने एक आयोग का प्रमुख बनाया गया| 1879-1882 तक उन्होंने बर्न में स्वास्थ्य अधिकारी के रूप में काम किया| 1890 में पूर्व और पश्चिम एशिया में उष्णकटिबंधीय रोगों का अध्ययन किया| रॉबर्ट कॉख ने सबसे पहले ट्युबर्कल बेसिलस (Tubercle bacillus) को अलग करने में सफलता प्राप्त की| 1883 में उन्होंने हैजा के जीवाणु की भी खोज कर ली थी| 

उन्होंने पशुओं में पाए जाने वाले एक संक्रामक एवं घातक रोग एंथ्रेक्स का भी अध्ययन किया| 1876 में उन्होंने यह बताया की एंथ्रेक्स के कारक जीवाणु, बीजाणुओं के माध्यम से ऑक्सीजन मुक्त वातावरण और कम तापमान में भी पनपते हैं| उन्होंने बैक्टीरिया को अलग करने की विधियों की भी खोज की और उनके कुछ सिद्धांतों को कॉख सिद्धांत (Koch’s Postulates) के नाम से भी जाना जाता है|