आइये जाने एंटीबॉडी की संरचना की खोज करने वाले महान वैज्ञानिक जेराल्ड मौरिस एडेलमैन(Gerald Maurice Edelman) के बारे में,

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जेराल्ड मौरिस एडेलमैन Gerald Maurice Edelman   1929-2014) 

एंटीबॉडी की संरचना की खोज –

 प्रकृति ने हमें बीमारी पैदा करने वाले बैक्टीरिया आदि से बचाव के लिए हमें दो तरह के सुरक्षा तंत्र प्रदान किये हैं| पहली लिम्फ कोशिकाएं जो रक्त और शरीर की अन्य ग्रंथियों में पाई जाती हैं, दूसरी एंटीबाडी जिसे लिम्फ कोशिकाओं द्वारा पैदा किया जाता है| मोटे तौर पर हमने इस बात को जानते थे कि, एंटीबॉडी किसी तरह का प्रोटीन होते हैं, लेकिन उनकी सटीक संरचना की खोज अभी की जानी थी।
प्रोटीन एमिनो एसिड की श्रृंखलाएं (chain) होते हैं और इन सभी अमीनो एसिड के अनुक्रम का निर्धारण करने की जरुरत थी| ब्रिटिश वैज्ञानिक प्रो रॉडने आर पोर्टर (Prof. Rodney R. Porter) भी इस काम को करने के लिए अग्रणी वैज्ञानिकों में से एक थे। अमेरिकन वैज्ञानिक एडेलमैन ने अपने प्रयोगों से यह पता लगाया की एंटीबॉडी में, एमिनो एसिड की एक नहीं बल्कि दो श्रृंखलायें होती हैं| उनमें से एक, लंबी और भारी और दूसरी छोटी और हल्की होती है

| उनकी इस खोज से बेहतर एंटीबायोटिक दवाओं के लिए नए रास्ते खुल गए| बाद में पोर्टर ने इस
बात का पता लगाया की ये श्रृंखलायें किस तरह से आपस में उलझीं होती हैं| उनके इस शोध ने एंटीबॉडी की संरचना पर काफी प्रकाश डाला और ये एंटीबाडी बैक्टीरिया से हमारी रक्षा कैसे करते हैं, इस बात को समझने में हमारी मदद की| उनकी इस खोज से हमें अंग प्रत्यारोपण (organ transplants) में भी मदद मिली| एडेलमैन और पोर्टर उनके श्रमसाध्य काम के लिए 1972 में संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार मिला|  

जीवन में प्रमुख घटनायें एवं प्रमुख वैज्ञानिक योगदान Major Events in Life & Major Scientific Contributions

जन्म – 1 जुलाई 1929, न्यूयॉर्क सिटी, संयुक्त राज्य अमेरिका
मृत्यु – 17 मई 2014, ला जोला, सैन डिएगो,
कैलिफोर्निया, संयुक्त राज्य अमेरिका एडेलमैन के पिता न्यूयॉर्क में एक चिकित्सक थे| न्यूयॉर्क पब्लिक स्कूल में अपनी शिक्षा के बाद उन्होंने उर्सिनस कालेज, पेंसिल्वेनिया से अपनी पढाई पूरी की| एडेलमैन एक वायलिन वादक बनना चाहते थे, लेकिन उन्होंने पेंसिल्वेनिया के मेडिकल स्कूल में प्रवेश लिया| उन्होंने चिकित्सक के रूप में अमेरिकी सेना के लिए पेरिस में काम किया|

 न्यूयार्क लौटकर वह रॉकफेलर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बन गए| वे नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज और कई अन्य अकादमियों के सदस्य रहे| उन्होंने 1950 में मैक्सिन एम मॉरिसन से शादी कर ली| 1954 में उन्हें पेनसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के स्पेंसर मॉरिस पुरुस्कार से सम्मानित किया गया| डॉ आरआर पोर्टर के साथ 1972 में चिकित्सा विज्ञानं के नोबेल पुरुस्कार से सम्मानित किया गया| 

उन्होंने इम्युनो-ग्लोब्युलिन (immuno-globulins) की संरचना पर काम किया और यह पटाया लगाया की ये दो तरह के प्रोटीन से बने होते है जो सल्फाहाईड्रल पुलों से जुड़े होते हैं| उन्होंने अणुओं और कोशिकाओं के विभाजन के नए तरीकों को भी खोजा| 1969 में मानव इम्युनोग्लोबुलिन के अमीनो एसिड अनुक्रम का भी पता लगाया| वर्तमान अनुसंधानों में उनकी रूचि प्रोटीन की संरचना, पौधों के उत्परिवर्तजन (plant mutagens) कोशिकाओं की सतह के अध्ययन में थी|